Sunday, January 29, 2012

बेहद भावुक क्षणों में गरिमा ने त्यागा घर-द्वार


फारबिसगंज (अररयिा) : बेहद भावुक क्षणों में माता-पिता, भाई-बहन, सखी-सहेलियों के लिये गरिमा बोथरा पराई हो गई। शनिवार को दीक्षा कार्यक्रम स्थल पर जाने से पहले घर पर जैन धर्म के अनुसार विधि पूर्वक गरिमा की विदाई हुई। घर पर हीं गरिमा का मुंडन हुआ। कल तक खूबसूरत कपड़ों में सजी रहने वाली गरिमा ने शनिवार को सफेद वस्त्र धारण कर लिए। मौके पर मां इचरज देवी की आंखों के आंसू रुक ही नही रहे थे। पिता प्रदीप बोथरा, दादा-दादी, भाई, चाचा-चाची की तो मुंह की आवाज ही जैसे गुम हो गई थी। जिस बच्ची को उन्होंने बड़े नाज से पाला था आज हुई लाडली बच्ची हमेशा के लिये घर-द्वार, माता-पिता, सांसारिक सुख त्याग कर वैरागन हो गयी थी। घर से महज एक सफेद वस्त्र में निकल पड़ी 20 वर्षीय गरिमा। इस अवसर पर वहां मौजूद सभी महिला-पुरुष भावुक हो उठे। सभी आंखे नम हो गई। कम उम्र में ही कठोर और अत्यधिक संयमित जीवन अपना लेने की चर्चा लोगों की जुबान पर रही। साधुमार्गी जैन संघ तथा सकल जैन समाज के द्वारा दीक्षार्थी बहन गरिमा उर्फ साध्वी गुंजन श्री जी के उज्जवल साध्वी जीवन की कामना कार्यक्रम के दौरान की। कार्यक्रम का संचालन महेश नाहटा ने किया।

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