Monday, July 25, 2011

मानव व्यापार: सभ्य समाज पर लगा सबसे बड़ा कलंक




अररिया : मानव व्यापार न केवल अनैतिक है, बल्कि सभ्य समाज के माथे पर लगा सबसे बड़ा कलंक है। यह बात अररिया के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वायुनंदन सिंह ने रविवार को संघ भवन में आयोजित एक कार्यशाला में कही। कार्यशाला का आयोजन डीडीडब्लुएस के सौजन्य से किया गया तथा इसमें कई न्यायाधीश, पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता व प्रबुद्ध जन शामिल हुए।
न्यायाधीश श्री सिंह ने कहा कि मानव व्यापार को रोकना हर हाल में जरूरी है। क्योंकि इससे नैतिकता का ह्रास होता है तथा पूरा समाज छिन्नभिन्न हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह व्यापार तथाकथित इंटलेक्चुअल लोगों द्वारा शुरू किया गया व्यापार है तथा सामाजिक दृष्टि से इससे अधिक घृणित कुछ हो ही नहीं सकता।
इसका कारण ढूंढ कर उसका निवारण करना जरूरी है। श्री सिंह ने कहा कि मानव व्यापार रोकने के लिए हमें अपनी हद से बाहर निकलना होगा तथा नैतिकता के स्तर को उठाना होगा।
वहीं, एडीजे शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मानव व्यापार के पीछे पैसे की लालच प्रमुख कारण है तथा सामाजिक विषमताओं की वजह से यह परवान चढ़ता है। इस पर नियंत्रण के लिए पुलिस व स्वयंसेवी संगठनों को सक्रिय होने की जरूरत है।
वरिष्ठ अधिवक्ता देव नारायण सेन ने कहा कि मानव व्यापार नियंत्रण के लिए अफसरशाही नहीं मानवीय दृष्टि जरूरी है।
कार्यक्रम की शुरूआत डीडीडब्लुएस के स्टेट प्रोग्राम मैनेजर कन्हैया सिंह ने की। वहीं, जिला समन्वयक
साकेत कुमार श्रीवास्तव ने जिले में मानव व्यापार नियंत्रण को ले चलाए जा रहे विभिन्न कार्यो की रूपरेखा रखी। जबकि संस्था की लीगल एडवाइजर तथा बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्रीमती रीता घोष ने बाल श्रम, बाल कल्याण सहित मानव व्यापार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर एडीजे जितेंद्र सिंह, अधिवक्ता अशोक मिश्र,डीपीओ चंद्र प्रकाश, कानूनी सलाहकार कन्हैया सिंह आदि ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में
एडीजे राधेश्याम सिंह,
पुलिस इंस्पेक्टर अनिल कुमार, आरपीएफ के सैयद एहसान अली सहित कई युवा पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

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