Wednesday, October 27, 2010
पूर्व डीएम,डीडीसी सहित सात के खिलाफ वारंट जारी
अररिया। इंदिरा आवास की आठ करोड़ राशि गबन मामले में पूर्व डीएम, डीडीसी व डीआरडीए के कार्यपालक अभियंता सहित सात के विरूद्ध सीजेएम न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी हुआ है। कोर्ट के इस बड़े फैसले से जिले के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। गबन के इस मामले में अररिया नगर थाना मे कांड संख्या 283/10 दर्ज हुआ है। जिसमें भादवि की धारा 406,409,420,467,468 एवं 120 बी के तहत मामला पंजीकृत किया गया था। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार वित्तीय वर्ष 04-05 में इंदिरा आवास के आवंटन में भारी अनियमितता की गयी थी। इस दौरान षडयंत्र के तहत अधिकारियों की मिलीभगत से इंदिरा आवस की करीब आठ करोड़ रूपये का बंदरबांट कर लिया गया। बाद में जांच के दौरान वर्तमान जिला पदाधिकारी एम सरवणन ने घपले का मामला पकड़ा तथा उनके निर्देश पर नगर थाना में तत्कालीन डीएम अमरेन्द्र नारायण सिंह एवं तत्कालीन डीडीसी वाल्मीकि प्रसाद सहित अन्य दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। मामले के अनुसंधान कर्ता पुलिस इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने छानबीन के बाद उक्त दोनों पदाधिकारियों के अलावा ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता रामाकांत शर्मा, सहायक अभियंता दीपक कुमार व मुकेश कुमार, कनीय अभियंता बीर बहादुर सिंह एवं धनपत मोदी को भी दोषी पाया। इंस्पेक्टर ने अपने जांच रिपोर्ट में लिखा है उक्त राशि का घोटाला डेहटी पैक्स के माध्यम से किया गया है। मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपेंद्र रजक ने अनुसंधान कर्ता के अनुरोध पत्र पर तत्कालीन डीएम, डीडीसी, कार्यपालक अभियंता सहित सात लोगों के खिलाफ गैर जमानतीय वारंट जारी कर दिया है।
आग लगने से दस लाख की संपत्ति जलकर खाक
अररिया। नरपतगंज प्रखंड के नाथपुर पंचायत के वार्ड नंबर नौ में बुधवार की रात नौ बजे आग लगने से दस घर जलकर राख हो गये। जिसमें बकरी, भैंस व पाट जलकर खाक हो गये।
इस घटना में लगभग दस लाख रूपये का नुकसान बताया जाता है। आग बुझाने के क्रम में मनोज कुमार राय, महेन्द्र कामेत, सावित्री देवी झुलस गये। घटना की पुष्टि प्रखंड विकास पदाधिकारी अरूण कुमार यादव ने की। अग्निपीड़ितों में मुंगालाल कामेत, महेन्द्र कामेत, उपेंद्र कामेत, रामकुमार कामेत, सुरेन्द्र कामेत, उमेश कामेत, धीरेन्द्र कामेत, योगेन्द्र कामेत शामिल है। आग लगने के कारणों का पता नही चल सका है
पुरूषों के पलायन के कारण बढ़ा महिलाओं का वोट प्रतिशत
अररिया। कामगारों के पलायन एवं क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या को मिटाने के उद्देश्य से आरंभ की गयी मनरेगा योजना पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पायी है। संपन्न विधानसभा के मतदान में ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान केन्द्रों पर महिलाओं की ज्यादा उपस्थिति स्पष्ट कर रही थी कि उनके घरों में पुरुष नहीं हैं। काम के अभाव एवं अपने परिवार के भरण पोषण की चिंता को लेकर मजदूरों का लगातार पलायन दिल्ली, पंजाब सहित अन्य प्रदेशों में हो रहा है।
पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत चलाए जा रहे कार्यक्रमों में भी पारदर्शिता नहीं है। किसी पंचायत में फर्जी पासबुक की शिकायत है तो कहीं कार्डधारी रोजगार से वंचित है। प्रखंड के अधिकांश पंचायतों में मजदूर शिकायत करते रहे हैं कि उनका जाब कार्ड या तो जनप्रतिनिधि के पास है अथवा रोजगार सेवक के पास। सरकार कामगारों के पलायन एवं उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कवायद करती रही है। परन्तु इस योजना के क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं होने के कारण बहुउद्देश्य योजना का लाभ मजदूरों को नहीं हो पा रही है। प्रखंड में इस योजनाओं का बारीकियों से अध्यन किया जाए तो कई खामियां एक साथ उजागर होंगे। हालांकि, कार्यक्रम पदाधिकारी बताते हैं कि योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से चल रहा है।
Tuesday, October 26, 2010
इलाहाबाद बैंक की रानीगंज शाखा में सीबीएस प्रणाली शुरू
अररिया। आधुनिक बैंकिंग प्रणाली के तहत कदम से कदम मिलाते हुए इलाहाबाद बैंक की रानीगंज शाखा में भी सीबीएस प्रणाली का शुभारंभ किया गया है। शुभारंभ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शाखा प्रबंधक मिथलेश कुमार झा ने मगंलवार को ग्राहकों को इस सेवा की जानकारी विस्तार पूर्वक दी। जिले में इलाहाबाद बैंक की पहली शाखा में इस प्रणाली की शुरूआत की गयी है।
शाखा प्रबंधक ने इस मौके पर ग्राहकों को बताया कि इस प्रणाली के आरंभ होते ही ग्राहकों को इंटरनेट, बैंकिंग, एटीएम सुविधा, आरटीजीएस, नेफ्ट, एसएमएस एलर्ट आदि सुविधा आरंभ कर दी गयी है। सुविधाओं की जानकारी के दौरान उपस्थित बैंक कर्मी ने बताया कि ग्राहकों को बेहतर सुविधा सेवा के लिए बैंक कृत संकल्पित है। इन सेवाओं के आरंभ होने पर ग्राहकों ने काफी प्रसन्नता व्यक्त की है। लगभग तीस वर्षो से रानीगंज में ग्राहकों को बैंकिंग सेवा प्रदान करने वाला यह पहला बैंक है। फिलहाल इस बैंक में लगभग पांच हजार ग्राहक हैं। इस मौके पर शाखा में सहायक प्रबंधक राम सज्जन चौधरी, डीएन मांझी, उदयशंकर झा, प्रो. दयानन्द राउत, विनोद भगत, प्रदीप पोद्दार आदि उपस्थित थे।
शाखा प्रबंधक ने इस मौके पर ग्राहकों को बताया कि इस प्रणाली के आरंभ होते ही ग्राहकों को इंटरनेट, बैंकिंग, एटीएम सुविधा, आरटीजीएस, नेफ्ट, एसएमएस एलर्ट आदि सुविधा आरंभ कर दी गयी है। सुविधाओं की जानकारी के दौरान उपस्थित बैंक कर्मी ने बताया कि ग्राहकों को बेहतर सुविधा सेवा के लिए बैंक कृत संकल्पित है। इन सेवाओं के आरंभ होने पर ग्राहकों ने काफी प्रसन्नता व्यक्त की है। लगभग तीस वर्षो से रानीगंज में ग्राहकों को बैंकिंग सेवा प्रदान करने वाला यह पहला बैंक है। फिलहाल इस बैंक में लगभग पांच हजार ग्राहक हैं। इस मौके पर शाखा में सहायक प्रबंधक राम सज्जन चौधरी, डीएन मांझी, उदयशंकर झा, प्रो. दयानन्द राउत, विनोद भगत, प्रदीप पोद्दार आदि उपस्थित थे।
चिकित्सक समेत आठ के खिलाफ मामला दर्ज
अररिया। एक निजी क्लिनिक के चिकित्सक समेत आठ लोगों के खिलाफ व्यवहार न्यायालय में मैनापुर निवासी मो. शाकीर उर्फ कारु ने मंगलवार को मामला दर्ज कराया है। जिसमें चिकित्सक द्वारा फीस के रूप में राशि वसूलने के उपरांत इलाज नहीं करने तथा मारपीट करने का आरोप लगाया है। न्यायालय में दायर अभियोग पत्र संख्या 3585/10 में मो. शाकीर ने उल्लेख किया है कि उनके पुत्र महताब (आठ वर्ष) को 24 अक्टूबर को एक मोटर साइकिल चालक ने ठोकर मार दी। घायल महताब को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से डयूटी पर तैनात चिकित्सक ने उसे डा. अरशद के यहां ले जाने की सलाह दी। तब दस हजार रुपये चिकित्सक के पास जाम भी किया फिर भी उन्होंने बच्चे का इलाज शुरू नहीं किया। बाद में चिकित्सक ने कम्पाउंडरों की मदद से मारपीट कर क्लिनिक से भगा दिया। मो. शाकीर ने न्यायालय में दर्ज मामले में डा. अरशद के अलावा शकील अहमद, मो. अकरम, पप्पू, सरफराज, शमशाद, तोसीद आलम व अफजल को नामजद अभियुक्त बनाया है।
अग्निकांड: भीषण अग्निकांड में मवेशी समेत लाखों की संपत्ति खाक
अररिया। अररिया आर.एस. ओपी क्षेत्र के हयातपुर पंचायत अंतर्गत मजकूरी में सोमवार की देर रात हुई भीषण अग्निकांड में मवेशी समेत लाखों की संपत्ति जलकर राख हो गयी। इस घटना में दो बच्चे के झुलसने की बात बतायी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रात के ग्यारह बजे किसी के गोहाल से आग उठी और धीरे-धीरे आस-पास के घरों को अपने चपेट में ले लिया। तब तक ग्रामीण एवं अग्निशामक दस्ता आग पर काबू पाते तब तक दस परिवारों के एक दर्जन घर जलकर नष्ट हो गया। इस दौरान पीड़ितों के घरों में रखा पटुआ, अनाज, कपड़ा, बर्तन, फर्नीचर जलकर नष्ट हो गया। पीड़ित परिवारों में फकार अंसारी, अयास अंसारी, रफीक अंसारी, ताजुद्दीन, मेराज अंसारी, फकरूद्दीन अंसारी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इस घटना में सबसे अधिक क्षति फकार अंसारी की हुई है। ग्रामीणों के अनुसार पीड़ितों के आधा दर्जन बकरी-मुर्गी भी जल गये। घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेता मोईदुर्रहमान, पूर्व मुखिया मो. खालिद ने परिजनों को तत्काल मुहैय्या करायी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रात के ग्यारह बजे किसी के गोहाल से आग उठी और धीरे-धीरे आस-पास के घरों को अपने चपेट में ले लिया। तब तक ग्रामीण एवं अग्निशामक दस्ता आग पर काबू पाते तब तक दस परिवारों के एक दर्जन घर जलकर नष्ट हो गया। इस दौरान पीड़ितों के घरों में रखा पटुआ, अनाज, कपड़ा, बर्तन, फर्नीचर जलकर नष्ट हो गया। पीड़ित परिवारों में फकार अंसारी, अयास अंसारी, रफीक अंसारी, ताजुद्दीन, मेराज अंसारी, फकरूद्दीन अंसारी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इस घटना में सबसे अधिक क्षति फकार अंसारी की हुई है। ग्रामीणों के अनुसार पीड़ितों के आधा दर्जन बकरी-मुर्गी भी जल गये। घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेता मोईदुर्रहमान, पूर्व मुखिया मो. खालिद ने परिजनों को तत्काल मुहैय्या करायी।
मक्का के अधिक उत्पादन के लिए अधिकृत कंपनी के ही बीज खरीदें
अररिया। गत वर्ष मक्का के बाली में दाना नहीं लगने से हलकान जिले के प्रभावित किसान एक बार फिर मक्का फसल लगाने को ले पशोपेश में हैं। ज्ञात हो कि गत वर्ष मक्का किसानों के चेहरे पीले पड़ गये थे और उनकी खस्ताहाल माली हालत ने कर्जदार बना दिया था। इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी वैद्यनाथ प्रसाद यादव ने मक्का किसानों को इस बार एहतियात बरतने के साथ ही ठोस उपाय पर अमल करने का सुझाव दिया है। डीएओ श्री यादव ने किसी खास ब्रांड के बीजों का प्रयोग करने से परहेज करते हुए कहा कि बिहार राज्य बीज निगम के बीज, एनएससी बीज, हाईब्रीड बीज के अलावा ग्लोबलाइजेशन कंपनियों को भी बीज विक्रय करने की अनुज्ञप्ति दे रखी है। उन्होंने कहा कि अच्छे क्वालिटी के उन्नत बीज, नियत तापमान एवं उपयुक्त समय पर बीजारोपण करने से मक्का किसानों को निराश नहीं होना पड़ेगा, बल्कि पैदावार अच्छी होगी और उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी।
रब्बी की प्रमुख फसलों में से एक मक्का के बीच का जर्मिनेशन के समय 15 डिग्री सेंटीग्रेड उपयुक्त तापमान माना गया है। लेकिन उन्होंने किसानों को आगाह करते हुए खास सलाह दी है कि बीजारोपन ऐसे समय किया जाए कि जनवरी माह में मक्के की बाली में रेशा नहीं आवे तो सिंचाई की माकूल व्यवस्था हो। फिर पेशोपेश में फंसे किसानों के चेहरे दमकने लगेंगे।
रब्बी की प्रमुख फसलों में से एक मक्का के बीच का जर्मिनेशन के समय 15 डिग्री सेंटीग्रेड उपयुक्त तापमान माना गया है। लेकिन उन्होंने किसानों को आगाह करते हुए खास सलाह दी है कि बीजारोपन ऐसे समय किया जाए कि जनवरी माह में मक्के की बाली में रेशा नहीं आवे तो सिंचाई की माकूल व्यवस्था हो। फिर पेशोपेश में फंसे किसानों के चेहरे दमकने लगेंगे।
सीमांचल ट्रेन के लगातार विलंब से चलने पर यात्री परेशान
अररिया। सीमावर्ती क्षेत्र से दिल्ली जाने वाली एक मात्र ट्रेन सीमांचल एक्सप्रेस के विगत पंद्रह दिनों से काफी विलंब से पहुंचने के कारण यात्रियों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। इस ट्रेन में अत्यधिक भीड़ के कारण कई यात्री ट्रेन पर सवार नहीं हो पा रहे हैं। फारबिसगंज स्टेशन सलाहकार समिति के सदस्य सुभाष अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली से लौटने के क्रम में यह ट्रेन पटना तक तो लगभग ठीक ठाक पहुंच जाती है लेकिन उसके बाद कटिहार और फिर फारबिसगंज एवं जोगबनी तक आने में कई घंटे विलंब होती है। बताया कि कई बार तो यह ट्रेन फारबिसगंज से दिल्ली के लिए निर्धारित प्रस्थान समय के घंटों बाद दिल्ली से वापस पहुंचती है। फिर जोगबनी जाकर दिल्ली के लिए निर्धारित समय के घंटों बाद खुलती है। ट्रेन अत्यधिक लेट होने के कारण यात्रियों को घोर कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि इस ट्रेन में अत्यधिक भीड़ होने के कारण भी अक्सर कई यात्री उस पर सवार ही नहीं हो पाते। श्री अग्रवाल ने एनएफ रेल प्रशासन से इस महत्वपूर्ण ट्रेन के सुचारू परिचालन एवं पूर्णकालिक रैक लगाने की मांग की है।
Monday, October 25, 2010
ट्रैक्टर पलटने से चालक की मौत
अररिया। जोकीहाट प्रखंड अंतर्गत चैनपुर गांव में सोमवार को ट्रैक्टर पलटने से एक युवक की मौत हो गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार चैनपुर के चन्द्रशेखर बांध के निकट बालू भरा एक ट्रैक्टर के अचानक पलट जाने से ट्रैक्टर चालक फैजान आलम की मौत गाड़ी के नीचे दबकर हो गयी। चालक चैनपुर गांव का निवासी बताया जाता है। घटना के बाद से गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।
नेपाली मिलावटी सामानों की बिक्री धड़ल्ले से
अररिया। भरगामा प्रखंड क्षेत्र के दैनिक उपयोगी सामग्री हेतु प्रसिद्ध विभिन्न हाट बाजारों में इन दिनों नेपाली मिलावटी सामानों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। लिहाजा एक तरफ उपभोक्ता वाजिब मूल्य से भी कहीं अधिक कीमत चूकाकर नकली या फिर मिलावटी सामान खरीदने पर मजबूर हैं। वहीं व्यवसायी या नेटवर्क से जुड़े लोग उपभोक्ताओं में इन सामानों को बेच दोनों हाथ धन बटोर रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि प्रशासन ने इस अवैध धंधे पर ध्यान नहीं दिया हो या अंकुश लगाने का प्रयास न किया हो। सूत्रों के मुताबिक कुछ समय पूर्व प्रशासन हरकत में आयी, जिससे इस तरह के धंधे पर काफी हद तक विराम भी लगा। किंतु जैसा कि बताया जा रहा है माहौल के सामान्य होते ही यह धंधा एक बार फिर फलने-फूलने लगा है। यहां बताते चले कि सरसो तेल, सुपाड़ी, इलाइची, डालडा, लौंग आदि ऐसी कई जरूरी व दैनिक उपयोग में आने वाली खाद्य सामग्री है जो नकली या नेपाली कही जाती है। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों की माने तो इन नकली या नेपाली कहीं जाने वाली सामानों में असली और नकली का इतना मामूली फर्क होता है कि आम उपभोक्ता अक्सर गच्चा खा जाते हैं। और झांसे में आकर कथित नकली, मिलावटी या नेपाली सामान खरीद बैठते हैं। इधर, सूत्रों की माने तो ऐसे सामानों की व्यवसायियों की एक पूरा नेटवर्क है जो प्रखंड के भिन्न क्षेत्र यानि गांव-देहात तक फैला हुआ है। इतना ही नहीं इसके अलावा माध्यम से व्यवसायी या नेटवर्क से जुड़े लोग न सिर्फ दोनों हाथों धन बटोर रहे हैं बल्कि सरकार को भी एक बड़े राजस्व से वंचित रखकर बड़ी ही सहजता से चूना लगा रहे हैंI
जाब कार्ड तो बना पर नहीं मिला रोजगार, हो रहा पलायन
अररिया। विभागीय प्रयास के बावजूद भरगामा के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों से भी मजदूरों की बड़ी संख्या अन्यत्र पलायन को मजबूर है। सौ दिन रोजगार उपलब्ध करवाने का दावा इन क्षेत्रों में हवा हवाई साबित हो रहा है। जबकि मजदूरों के जॉब कार्ड का उल्लेख कर फर्जी तरीके से राशि निकासी करने का कार्य बिचौलियों द्वारा धड़ल्ले की की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रखंड भर में जॉब कार्ड धारियों की संख्या 24,000 के करीब है, जिसे 100 दिन का रोजगार मनरेगा के तहत उपलब्ध कराया जाना था। जॉब कार्डधारी बासुदेव राम, देवसूनी राम, जगदीश राम, नामो राम आदि बताते हैं कि बहुत प्रयास व अधिकारियों समेत जन प्रतिनिधियों की लगातार खुशामद के बाद जॉब कार्ड तो बन गया किंतु रोजगार सौ दिन तो दूर एक भी दिन का भी उपलब्ध नहीं कराया गया। प्रखंड के बांकी जॉब कार्ड धारियों की स्थिति भी समान ही बतायी जा रही है। ऐसा नहीं है कि विभाग द्वारा जॉब कार्ड धारियों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास नहीं किया गया। किंतु सूत्रों के मुताबिक यह प्रयास संरक्षण प्राप्त बिचौलिये के लिए हीं लाभकारी सिद्ध हुआ। आरोपों के मुताबिक ऐसे बिचौलिये द्वारा प्रत्यक्ष या अपरोक्ष रूप से लाभुकों के जॉब कार्ड का इस्तेमाल विभिन्न योजना में कहने के उपरांत राशि का बंदरबांट बड़ी ही सहजता से कर लिया जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतने बड़े गोलमाल के बावजूद प्रशासन मौन क्यों है? रोजगार दिलाने या फिर बिचौलियों के धड़-पकड़ के लिए किये गये? आदि कई ऐसे सवाल है जो गहन छानबीन का विषय है। तथा जिसका जवाब न तो शुभ चिंतक होने का दंभ भरने वाले जनप्रतिधियों के पास और न विभाग के पास। बहरहाल एक तरफ विभाग रोजगार उपलब्ध करवाने को लेकर जहां तरह-तरह के दावे कर रही है। वहीं भूखमरी के लगभग कगार पर पहुंच चुके क्षेत्र के मजदूर वर्गो का क्षेत्र से अन्यत्र पलायन बदस्तूर जारी है।
अशिक्षा व निर्धनता के कारण महिलाएं हो रही घरेलू हिंसा की शिकार
अररिया। घरेलू हिंसा शारीरिक यौन व मनोवैज्ञानिक दुरुपयोग है। जो किसी के पति या पत्नी, भागीदार या गृहस्थी के अधीन अन्य पारिवारिक सदस्यों के बीच होता है। घरेलू हिंसा तब होती है जब परिवार का सदस्य शारीरिक व मनोवैज्ञानिक रूप से अन्य को अधिशासित करने का प्रयत्न करता है। घरेलू हिंसा में मुख्य रूप से शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा, यौन दुराचार, मनोवैज्ञानिक हिंसा, आर्थिक दुरुपयोग व अध्यात्मिक कारणों से होता है। अररिया जिला में महिलाएं बड़ी संख्या में घरेलू हिंसा की शिकार हो रही है। इस जिले में मुख्य रूप से दहेज, मारपीट, बलात्कार, पत्नी के रहते दूसरी शादी व संपत्ति में भागीदारी को लेकर महिलाओं पर अत्याचार का मामला बड़े पैमाने पर हो रहा है। साथ ही बाल महिलाएं (दाई व नौकरानी) पर यौन शोषण का भी मामला प्रकाश में आते रहता है। गरीबी व अशिक्षा के कारण लाचार व बेबस अभिभावक परिवार चलाने के लिए कम उम्र की बच्चियों को भी दाई के रूप में काम करवाते हैं जिनका शारीरिक यौन शोषण शुरू हो जाता है।
घरेलू हिंसा के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण पलायन भी है। पहले केवल युवा वर्ग ही रोजगार की तलाश में पलायन करते थे लेकिन आज गरीबी के कारण सपरिवार भी पलायन हो रहा है, जिस कारण वहां उनके परिवार का शोषण भी किसी न किसी रूप में होता है। दूसरी ओर जो परिवार छोड़कर जाते हैं वो अपने घर में भी किसी न किसी रूप में घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। अररिया जिले में घरेलू हिंसा के मामले बड़ी संख्या में सामने आए हैं। इसी कारण न्यायालय में दहेज, मारपीट, प्रताड़ना, दूसरा विवाह, यौन शोषण के मामले बड़ी संख्या में रोजाना आते हैं। इस संबंध में अधिवक्ता सदरे आलम ने बताया कि घरेलू हिंसा में पीड़ित महिलाओं का केश अररिया में बहुत ज्यादा हो रहा है। यही कारण है कि सैकड़ों महिलाएं न्याय प्राप्त करने के लिए कचहरी में चक्कर लगाती रहती है। 2005 के अधिनियम के अनुसार घरेलू हिंसा को रोकने के लिए हर जिले में महिला संरक्षण अधिकारी की नियुक्ति होती है, लेकिन बिहार के किसी भी जिला में इसकी नियुक्ति नहीं हुई है। तत्काल महिला हेल्प लाइन की परियोजना प्रबंधक ही महिला संरक्षण पदाधिकारी के रुप में प्रतिनियुक्त हैं। अररिया में पिछले छह माह से परियोजना प्रबंधक नहीं है। इसलिए प्रभार में हेल्प लाइन से जुड़ी गीता कुमारी कार्य देख रही हैं।
गीता कुमारी ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में महिला हेल्प लाइन में अब तक 255 मामले आए हैं, जिसमें दहेज प्रताड़ना, मारपीट, तलाक, यौन शोषण, बलात्कार, ट्रैफिकिंग आदि के हैं। उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ सौ मामले को दोनों पक्षों के बीच सुलह कराकर समाप्त करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि अररिया का महिला हेल्प लाइन कई समस्याओं से जूझ रहा है। यहां एक प्रबंधक, एक महिला व एक पुरुष काउंसलर, तीन अधिवक्ता व एक आदेश पाल होना चाहिए। लेकिन एक प्रभारी गीता कुमारी व एक अधिवक्ता रुपेश कुमार के सहारे ये किसी तरह चल रहा है। इन्हें भी कई माह से मानदेय भुगतान नहीं हुआ है। जिले में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला के लिए 2006 से सौर्ट स्टे होम बना हुआ है। सौर्ट स्टे होम की संचालिका रत्नमाला ने बताया कि घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला जिनका कोई आश्रय नहीं है उसे यहां रखा जाता है। साथ ही उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा रोकने के लिए सख्त से सख्त कानून बना एवं उसको लेकर प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है। साथ ही स्कूलों में बालिकाओं के घरेलू हिंसा के संबंध में पूरी जानकारी एवं इस केलिए बने कानून की जानकारी समय की जरूरत बन गयी है। महिला हिंसा सहती है मगर अशिक्षा व निर्धनता के कारण इंसाफ नहीं ले पाती है।
वेतन को ले चौकीदार-दफादारो ने किया सीओ का घेराव
अररिया। विगत छह माह से वेतन नहीं मिलने से आक्राोशित फारबिसगंज अंचल क्षेत्र के दफादार चौकीदारों ने सोमवार को अंचल सह प्रखंड कार्यालय परिसर में अंचलाधिकारी का घेराव किया। वेतन की मांग को लेकर दफादारों एवं चौकीदारों ने अंचलाधिकारी शिवशंकर सिंह के सामने आक्रोश व्यक्त करते हुए शीघ्र लंबित वेतन के भुगतान की मांग की। सीओ श्री सिंह के द्वारा एक सप्ताह के अंदर वेतन भुगतान का आश्वासन दफादार चौकीदारों को दिया। दफादार चौकीदार संघ के अनुमंडल अध्यक्ष सच्चिदानंद सिंह के नेतृत्व में फारबिसगंज अंचल सहित नरपतगंज तथा भरगामा अंचल के दर्जनों सदस्य अभियान में शामिल थे। सच्चिदानंद सिंह सहित चौकीदार दिनेश पासवान, अशोक पासवान, जगदीश पासवान व अन्य ने कहा कि पिछले छह माह से उन लोगों का वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है जिस कारण उनके समक्ष भूखमरी की समस्या उत्पन्न हो गयी है। मामले को लेकर डीएम तथा एसडीओ को भी आवेदन देकर वेतन भुगतान करवाने का आग्रह किया जा चुका है। इन लोगों ने सीओ के समक्ष ही आरोप लगाया कि पूर्व में वेतन भुगतान के लिए अंचल कार्यालय में घूस देना पड़ता है। नरपतगंज तथा भरगामा अंचल में वेतन भुगतान नियमित रहने की बात भी बतायी गयी। इधर सीओ श्री सिंह न कहा कि वेतन मद की राशि चुनाव से करीब एक माह पूर्व ही आ गया था। लेकिन चुनाव के कारण भुगतान में विलंब हुआ। अब एक सप्ताह में सभी का भुगतान किया जायेगा। फारबिसगंज अंचल में कुल 95 दफादार चौकीदार है। घेराव करने वालों में चौकीदार पंकज पासवान, हीरालाल ठाकुर, मोहन दास, सूर्यानंद पासवान, नारायण मंडल, ब्रह्मदेव पासवान, नरेश पासवान, डोमी पासवान, इंद्रानंद पासवान, कपिलदेव पासवान, अवधेश पासवान सहित दर्जनों सदस्य मौजूद थे।
शर्मनाक: अस्पताल में बरामदे पर महिला ने जना बच्चा
अररिया। जिले के तेज तर्रार आईएएस जिलाधिकारी के निर्देशों के बावजूद सदर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है। बिना पैसे का इलाज नहीं करने, अस्पताल के चिकित्सकों का निजी क्लिनिक में अधिक समय देने जैसी शिकायतें यहां आम है। सोमवार को भी एक प्रसव पीड़ित गरीब महिला द्वारा नर्स को पैसे नहीं दिये जाने के कारण उसे भर्ती नहीं किया गया। जिस कारण उसने प्रसव कक्ष के सामने बरामदा पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। महिला को एक साथ तीन बच्चे को जना है जिसे देखने लोगों की वहां भीड़ जमा हो गयी। बाद में महिला व उसके परिजनों द्वारा भाड़ा व अन्य खर्च के लिए रखे तीन सौ रूपये एक नर्स को दिया। तब जाकर उसे वार्ड में भर्ती किया गया। हालांकि वहां मौजूद नर्स प्रमिला देवी ने बताया कि पैसा एक बिचौलिया ने लिया है। जबकि इस संबंध में पूछे जाने पर अस्पताल प्रबंधक विकास रंजन ने बताया कि वे इसकी जांच करायेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी बिचौलिया ने पैसा लिया तो वहां उपस्थित कर्मियों ने उसे पैसा कैसे लेने दिया, वे इसकी भी जांच करायेंगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पलासी प्रखंड के जहानपुर डुमरिया निवासी मो. लतीफ की पत्नी बीबी रूबेदा खातून प्रसव पीड़ा के बाद सोमवार की सुबह सदर अस्पताल में भर्ती हुई। उसके गर्भ में चूंकि तीन बच्चे थे। इसलिए उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी। जब वह अस्पताल पहुंची तो पहले उससे वहां उपस्थित नर्स एवं अन्य कर्मी ने 1000 रूपये की मांग की। अन्यथा पूर्णिया रेफर करने की बात कही। रूबेदा के पति ने कहा कि वह गरीब आदमी है। इतना पैसा कहां से लायेंगे। लेकिन नर्स उसे भर्ती करने को तैयार नहीं हुई। तब उसका पति पैसे की व्यवस्था करने बाहर निकला। इसी बीच रूबेदा ने प्रसव पीड़ा से छटपटाते हुए बरामदे पर ही तीन बच्चे को जन्म दे दिया। बावजूद कर्मियों को दया नहीं आई। बाद में उसके पति ने अस्पताल कर्मियों से आरजू मिन्नत की कि उसके पास सिर्फ भाड़ा और दवा के लिए सिर्फ तीन सौ रूपये हैं। अंत में उन लोगों ने उससे तीन सौ रूपये लेकर पीड़िता को वार्ड में भर्ती कराया। ज्ञात हो कि इस तरह की घटना सदर अस्पताल में अक्सर घटित होती है। लेकिन व्यवस्था में सुधार होता नहीं दिख रहा है। पूछे जाने पर प्रबंधक विकास रंजन ने बताया कि वे मामले की जांच करायेंगे।
पाकेटमार को पकड़कर किया आरपीएफ के हवाले
अररिया। सोमवार की संध्या फारबिसगंज रेलवे स्टेशन पर पाकेटमारी कर भाग रहे एक व्यक्ति को पीड़ित यात्री ने दौड़ाकर दबोचा तथा आरपीएफ के हवाले कर दिया। पकड़ा गया पाकेटमार मधुबनी निवासी मो. रईस अंसारी बताया जाता है। इस बाबत पीड़ित यात्री गिदवास भरहर निवासी बिहार पुलिस के जवान राकेश कुमार ने बताया कि वे छपरा जाने के लिए फारबिसगंज रेलवे स्टेशन पर सीमांचल ट्रेन पकड़ने के लिए आये थे। इसी क्रम में उक्त पाकेटमार ने स्टेशन पर भीड़ भाड़ का लाभ उठाकर उनका पाकेट मार लिया। इसका पता चलते ही उन्होंने पीछा कर उक्त पाकेट मार को पकड़ लिया। मौजूद लोगों ने पाकेटमार की जमकर पिटायी की तथा आरपीएफ प्रभारी को सौंप दिया। इधर पीड़ित के आवेदन पर मामले को जीआरपी जोगबनी को सौंपने की बात कही गयी है।
सड़क दुर्घटना में चार घायल, दो की हालत चिंताजनक
अररिया। अररिया-फारबिसगंज मार्ग पर मानिकपुर टावर चौक के निकट रविवार को ट्रक की ठोकर से मैजिक गाड़ी पर सवार चार यात्री गंभीर रूप से जख्मी हो गए। जिनमें से दो यात्री की हालत चिंताजनक बतायी जा रही है। सभी घायलों को चिकित्सा के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। डयूटी पर तैनात डा. जितेन्द्र ने आरटी मोहन के भूपेन्द्र ऋषिदेव एवं शुभंकरपुर के सुनील कुमार की गंभीर स्थिति को देखते हुए पूर्णिया रेफर कर दिया है। उधर ग्रामीणों ने खदेड़ कर उक्त ट्रक को पकड़ लिया।
रेणुग्राम से जाप्र के अनुसार मैजिक गाड़ी (बीआर38डी 7428) मानिकपुर स्कूल चौक पर सवारी के लिए खड़ी थी। वाहन पर कई सवारी भी बैठे थे। इसी बीच पीछे से आ रही ट्रक (डब्ल्यूबी 59-8779) ने मैजिक गाड़ी में जोरदार ठोकर मार दी। ठोकर लगते ही टेम्पो दूर जा गिरा तथा उस पर सवार सभी चार यात्री जख्मी हो गये। जिसमें दो की स्थिति सामान्य बतायी जाती है। इधर, सदर अस्पताल में डयूटी पर तैनात चिकित्सक डा. जितेन्द्र ने बताया कि भूपेन्द्र व सुनील को गंभीर चोटों आयी। एक की रीढ़ की हड्डी टूट गयी है तो दूसरे के सीने में गंभीर चोट है। इधर, दुर्घटना के बाद भाग रहे ट्रक को स्थानीय लोगों ने पीछा कर फारबिसगंज कालेज चौक पर पकड़ लिया है।
डूबे बच्चे का शव बरामद
अररिया। जोकीहाट बाजार के निकट शनिवार को नहाने गये दो बच्चों की बलुआ धार में डूबने से हुई मौत के बाद ग्रामीणों की मदद से रविवार को बचे एक बच्चा का शव बरामद किया गया है। ज्ञात हो कि सन्नी के शव को शनिवार को ही बरामद कर लिया गया था। वहीं सलमान नामक दस वर्षीय बालक का शव रविवार को ग्रामीणों ने गहरे पानी से निकाल कर बाहर किया। धनपुरा निवासी मो. जब्बार ने बताया कि शनिवार को देर रात तक सलमान के शव को जाल एवं गोताखोरों की मदद से खोजा गया लेकिन शव बरामद नहीं हो सका। रविवार को अचानक शव पानी में तैरता हुआ ग्रामीणों ने देखा जिसकी सूचना उनके परिजनों एवं ठेंगापुर निवासी मजहरूल को दी गयी। तब ग्रामीणों ने शव को पानी से निकाला। शव के मिलते ही घटनास्थल पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। घटना को लेकर परिजनों में मातम पसरा है।
Sunday, October 24, 2010
In Araria, ‘cheated’ labourers could turn tables on Nitish
ARARIA:- In this north-eastern end of Bihar, fewer people migrated this year to cities for work. On Thursday, this could turn into backward caste backlash against chief minister Nitish Kumar in this pocket. Sounds counter-intuitive? As with politics everywhere, and more so in Bihar, things are not as simple as they seem.
In three different clusters TOI visited in Araria on Wednesday, landless backward caste labourers — Paswans, backward Muslims and Musahars, with the latter two being Nitish's target groups — said they stayed back in their villages this year because they'd heard of the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (MNREGS). However, after two and three days of labour over the whole year, and no payment, Araria's labourers are angry and intend to show it through their vote.
The paradox lies in the fact that MNREGS is a UPA government scheme. But, as NDA members told TOI, the state government is being singled out for the scheme's failure here. Of course, on the flip side, the NDA government has gained from MNREGS wherever it has been successfully implemented, about which these members are not complaining! Echoing commonly held opinion, Mukesh Kumar Paswan, a landless Dalit, said, ''There has been no other job scheme for us. This was the only one, but we gained nothing from Nitish government.''
If Bihar's face for the rest of India is that of its hard-working migrants, then Araria has for decades been a force behind this image. In Paswan cluster of Lahotara panchayat, most men have worked in other cities in the past: Mithilesh Kumar Paswan worked as an agricultural labourer in Punjab, Gyanchandra Paswan went to Jaipur each year to run juice stalls. Mohammed Aziz worked as a whitewasher in Delhi for six months a year. In the Musahar cluster, Gayanand Rishidev went to Punjab. Many of these men chose not to migrate this year after they learned of MNREGS. All have more or less the same story: they asked for 100 days' work, got work for three to seven days, and got paid nothing.
''This year, I thought it would be better to stay back and work since my wife and I would both get work in the government scheme,'' said Suman Paswan. ''If you get work in your own village, why venture out?'' said Aziz. ''Next year, I'll wait to see if I can get work, or I'll go to Punjab,'' said a despairing Sitaram Rishidev of Paswan cluster.
In three different clusters TOI visited in Araria on Wednesday, landless backward caste labourers — Paswans, backward Muslims and Musahars, with the latter two being Nitish's target groups — said they stayed back in their villages this year because they'd heard of the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (MNREGS). However, after two and three days of labour over the whole year, and no payment, Araria's labourers are angry and intend to show it through their vote.
The paradox lies in the fact that MNREGS is a UPA government scheme. But, as NDA members told TOI, the state government is being singled out for the scheme's failure here. Of course, on the flip side, the NDA government has gained from MNREGS wherever it has been successfully implemented, about which these members are not complaining! Echoing commonly held opinion, Mukesh Kumar Paswan, a landless Dalit, said, ''There has been no other job scheme for us. This was the only one, but we gained nothing from Nitish government.''
If Bihar's face for the rest of India is that of its hard-working migrants, then Araria has for decades been a force behind this image. In Paswan cluster of Lahotara panchayat, most men have worked in other cities in the past: Mithilesh Kumar Paswan worked as an agricultural labourer in Punjab, Gyanchandra Paswan went to Jaipur each year to run juice stalls. Mohammed Aziz worked as a whitewasher in Delhi for six months a year. In the Musahar cluster, Gayanand Rishidev went to Punjab. Many of these men chose not to migrate this year after they learned of MNREGS. All have more or less the same story: they asked for 100 days' work, got work for three to seven days, and got paid nothing.
''This year, I thought it would be better to stay back and work since my wife and I would both get work in the government scheme,'' said Suman Paswan. ''If you get work in your own village, why venture out?'' said Aziz. ''Next year, I'll wait to see if I can get work, or I'll go to Punjab,'' said a despairing Sitaram Rishidev of Paswan cluster.
नहीं बच पायेंगे इंदिरा आवास घोटाले के आरोपी: एसपी
अररिया। विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद पुलिस प्रशासन ने फिर एक बार आरोपियों के धड़-पकड़ के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान में प्राथमिकता के तौर पर इंदिरा आवास घोटाले के आरोपी शामिल होंगे।
शनिवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए पुलिस कप्तान श्री कुमार ने कहा कि गत एक माह से अधिक समय से चुनाव में व्यस्तता के कारण इन मामलों पर ध्यान नहीं दिया गया। लेकिन अब यह प्राथमिकता के तौर पर निबटाई जायेगी।
उन्होंने बताया कि गरीबों की राशि में सेंधमारी करने वाले बिचौलिये, प्रतिनिधि या सरकारी कर्मी जो भी शामिल पाये जायेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जायेगा। इसके लिए उन्होंने सभी थाना क्षेत्रों की पुलिस को विशेष दिशा निर्देश जारी किया है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी थाना क्षेत्रों में ऐसे 56 मामले दर्ज किये गये हैं,जिसमें करीब एक दर्जन मामलों को निपटा लिया गया है। शेष को भी जल्द ही निष्पादित किया जायेगा। एसपी श्री कुमार ने बताया कि अनुसंधान के क्रम में कुछ नये आरोपी भी सामने आ रहे हैं उन्हें भी बख्सा नहीं जायेगा।
नेताओं की महफिल से गुलजार हो रहे नेपाल के मयखाने
अररिया। पहले चरण के विधानसभा चुनाव का मतदान तो समाप्त हो गया किंतु परिणाम की लंबी प्रतिक्षा ने प्रत्याशी और समर्थकों का तनाव बढ़ा दिया है। जिस कारण वे नेपाल के मयखाने का रूख कर रहे हैं। मयखाना उनके लंबे इंतजार की बेचैनी दूर करने में सहायक साबित हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार चुनाव संपन्न होने के साथ ही सभी प्रत्याशी अपनी जीत पक्की बताने में लगे हुए हैं। खासकर मुख्य मुकाबले में शामिल प्रत्याशी व उनके खास समर्थक मतों का गणित सुलझाने में काफी माथापच्ची कर रहे हैं। लेकिन चुनाव परिणाम की लंबी प्रतिक्षा ने उन्हें बैचेन कर रखा है। इसी बैचेनी में कई प्रत्याशी व समर्थक नेपाल के बीयरबार में टेंशन फ्री होने पहुंच रहे हैं। मतदान के बाद सीमावर्ती क्षेत्र के नेताओं का नेपाल का दौरा बढ़ गया है।
इधर जानकारों की मानें तो संपन्न चुनाव ने सभी प्रत्याशियों की धड़कने बढ़ा दी है। फिलहाल चुनाव परिणाम आने तक नेपाल के इन वादियों में नेताओं की धमा चौकड़ी से बीयरबार भी राजनीति अखाड़ों में तब्दील हो गया है।
Subscribe to:
Posts (Atom)