Saturday, February 18, 2012

ईट भट्ठों में स्याह होती है गरीबों की जिंदगी


अररिया : जिले के विभिन्न ईट भट्ठों में कोयले की धधकती आग में मजदूरों की जिंदगी भी तपती है। भट्ठा मालिक नाबालिगों को आग की तपिश में तो झोंकते ही हैं, महिला मजदूरों के शारीरिक शोषण, मजदूरी का दोहन तथा मारपीट की घटनाएं आम बात है।
चातर के मटियारी में मामला उजागर होने के बाद शोषण, व प्रताड़ना से जुडे़ कई अमानवीय पहलू भी उजागर हुये है। इस घटना से जिले के आम लोग सकते में है। खास बात यह कि भट्ठा मालिकों द्वारा अमानवीयता का खेल उन्हीं मजदूरों के साथ होता है जो अन्य प्रांतों के होते हैं। हुस्ना ब्रिक्स कंपनी के मालिक एवं मुंशी के अमानवीय व क्रूर व्यवहार का शिकार बनने वाले मजदूर भी असम के कोकराझाड़ जिला के रहने वाले हैं।
रेस्क्यू के दौरान महिला मजदूरों ने जब अपनी आपबीती अररिया के एसपी शिवदीप लांडे के समक्ष सुनायी तो वहां खड़े सैकड़ों लोग भौंचक रह गये। मजदूर सागर ऋषिदेव ने बताया कि 15 दिन पूर्व इसी भट्ठे पर मनोज ऋषिदेव की पत्‍‌नी मर गयी थी। पुलिस इस मामले के खोजबीन में जुट गयी है कि यह हत्या थी या नेचुरल डेथ। तकरीबन ग्यारह माह पहले अररिया आरएस व रानीगंज की सीमा पर एक मजदूर का शव पाया गया था। अनुसंधान के दौरान वह मजदूर भी असम राज्य का निकला। उस मजदूर की हत्या कैसे हुई इस बात का खुलासा आज तक नही पाया है। जबकि वह भी ईट भट्ठा में ही काम करने वाला मजदूर था। समय-समय पर श्रम विभाग के रेस्क्यू के दौरान ईट भट्ठे से दर्जनों बाल श्रमिक निकाले जाते हैं। इसके बावजूद भट्ठों में बाल श्रमिकों की तादाद कम नहीं हो रही है।

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