Saturday, January 1, 2011

विकास से अछूते सीमावर्ती गावों में सक्रिय हो रहे असामाजिक तत्व

सिकटी (अररिया) : भारत-नेपाल अन्तरराष्ट्रीय सीमा पर बसे सिकटी प्रखंड के सामरिक महत्व वाले गांवों का आजादी के बाद अब तक समुचित विकास नहीं हो पाया है जिस कारण यहां भारत विरोधी शक्तियां सक्रिय हो रही हैं। भारत विरोधी कायरें में संलिप्त असामाजिक तत्व यहां के भोले भाले ग्रामीणों को बहका कर आज तस्करी सहित अन्य गैरकानूनी कायरें की ओर मोड़ने में सफल हो रहे हैं। जबकि सीमावर्ती गावों का विकास सीमा विकास योजना के तहत किये जाने की बात राजनेता समय समय पर करते रहे हैं किंतु सरजमींन पर यह आज तक नहीं उतर पाया।
सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण सिकटी प्रखंड सामरिक दृष्टि कोण से अति महत्वपूर्ण है। लेकिन सीमावर्ती गांवों में अब तक सड़क की सुविधा भी ठीक ढंग से मुहैया नहीं कराया गया है। इस इलाके के लोग अपनी जरूरतों की पूर्ति बीमारी का इलाज, दैनिक उपभोग की सामग्री आदि के लिए नेपाल के स्वास्थ्य केन्द्र व बाजार जाना आसान समझते हैं। सीमा पर बसे इस प्रखंड के पीरगंज, दहीपौरा, बोका, वारुदह, लेटी, मुरारीपुर, केलावाड़ी, सिकटी, सैदाबाद, सोनापूर, आमबाड़ी, कुचहा गांव वालों को प्रखंड एवं जिला मुख्यालय जाने के लिए आज तक सुगम रास्ता उपलब्ध नहीं हो सका है। इलाके के किसानों को फसल बिक्री केन्द्र नहीं रहने के कारण अपना अनाज नेपाल क्षेत्र में बेचना पड़ता है। इन क्षेत्रों मे शिक्षा के लिए बना विद्यालय अधिकारियों के द्वारा पर्यवेक्षण नहीं किये जाने से अधिकांशत: बंद पड़े रहते हैं। कई विद्यालयों में तो एसएसबी के कैंप स्थापित हैं। जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। इलाके में कोई उद्योग नहीं रहने से भी लोग बेरोजगारी की समस्या से ग्रसित हैं। सड़क, बिजली, समुचित स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा से महरूम ग्रामीणों को चन्द सियासी व असामाजिक तत्व भौतिक चकाचौंध का लालच देकर गलत रास्तों पर चलने को प्रेरित कर रहे हैं। लोग अपने जीवन यापन के लिए तस्कर माफियाओं के वाहक बन बैठे हैं।
वाहक के रूप में काम कर रहे कई लोगों ने नाम नही छापने के शर्त पर बताया कि अगर यह काम rनही करें तो हमारे घर का चूल्हा नही जल पाएगा। यह ठीक हैं कि जीवन यापन के लिए खाद्य पदार्थो को उस पार भेजा जाता है लेकिन इस आड़ में हथियार एवं मादक द्रव्यों की तस्करी से इनकार नही किया जा सकता है। हाल के दिनों में कुचहा सीमा पर करोड़ों की हेरोइन बरामदगी इसका उदाहरण है। इस इलाके के लिए जब तक भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा सीमा क्षेत्र विकास योजना के तहत कार्य योजना बनाकर विकास नही कया जाता है, इस क्षेत्र की हालत सुधरने वाली नहीं है। खुली सीमा होने के कारण आतंकी गतिविधियों की संभावना बनी रहती है हालांकि नेपाल से सटे प्रखंड के सीमा क्षेत्र मे नौ एसएसबी कैंप स्थापित हैं तथा सिकटी थाना पुलिस भी सभी गतिविधियों पर नजर रखती है।

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