Saturday, January 1, 2011

पर्यावरण संरक्षण में मनरेगा को मिल रही सफलता

अररिया : केंद्र सरकार की अति महत्वपूर्ण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जहां जिले में एक तरफ फिसड्डी दिख रही है। वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सफल होती दिख रही है। विकास के नाम पर भले ही गांवों में वृक्ष काटे जा रहे हों, मनरेगा की इस स्कीम ने वृक्षों की कमी को दूर करने का प्लान बनाया है, उसके सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं।
मनरेगा योजना के तहत जिले के विभिन्न पंचायतों में सात लाख से अधिक वृक्ष लगाये जा चुके हैं। एक तो मनरेगा के तहत मजदूरों को मजदूरी भी मिल रही है और दूसरी तरफ दूषित हो रहे पर्यावरण को सुरक्षित करने का कारगर उपाय साबित हुआ है।
वित्तीय वर्ष 2010 में मनरेगा के तहत वृक्षारोपण की कुल 3547 योजनाएं स्वीकृत कर प्रति योजना 200 वृक्ष लगाये गये। जिस पर करीब 16 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हुई है। डीएम एम सरवणन ने भी वृक्षारोपण कार्य के प्रति काफी सख्ती दिखाते हुए खुद कई गांवों का दौरा किया। प्रशासन द्वारा सिर्फ वृक्ष लगा देने तक ही नहीं छोड़ा गया बल्कि प्रहरी एवं वन रक्षक बहाल कर उसकी निगरानी भी करवायी जा रही है। रानीगंज प्रखंड के धोबनिया, घघरी, सिकटी के खोड़ागाछ, अररिया के पैकटोला, बोची, कुसियारगांव, नरपतगंज के सोनापुर, मधुरा उत्तर, तामगंज, भरगामा के शंकरपुर तथा आदि रामपुर ऐसे पंचायत है जहां मनरेगा के तहत लगाये गये वृक्ष लहलहा रहे हैं।
उप विकास आयुक्त उदय कुमार सिंह के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष के लिए लाखों पेड़ लगाने का बजट तैयार कर विभाग भेजा जा रहा है। इनके अनुसार कुल 3533 वृक्षारोपण की योजनाओं का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वहीं डीआरडीए मनरेगा के परियोजना अर्थशास्त्री मनोज कुमार ने बताया कि वृक्षारोपण योजना सबसे सफल साबित हो रही है। इतना ही नहीं सिर्फ वृक्षारोपण योजना के माध्यम से जिले के 27 लाख मानव दिवस का सृजन हुआ है जो प्रशासन के लिए बड़ी उपलब्धि है।

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