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Sunday, June 24, 2012

मारा गया कुख्यात डकैत हबुआ


अररिया/पलासी : पिछले दो दशक तक आतंक का पर्याय रहा कुख्यात डकैत हबीब उर्फ हबुआ मारा गया। पुलिस ने शनिवार को ताराबाड़ी व पलासी थाना क्षेत्र की सीमा पर दोमुख नदी के पूर्वी किनारे से उसका शव बरामद किया है। वह पलासी थाना क्षेत्र की बस्ती का रहने वाला था और वर्तमान में अपराध की दुनिया छोड़ चुका था। यद्यपि, उसके खिलाफ विभिन्न थानों में सोलह आपराधिक मामले दर्ज थे।
एसपी शिवदीप लांडे ने बताया कि हबुआ की हत्या विश्वास में लेकर की गई है। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि हबुआ के साथ पहले मारपीट की गई फिर गले में फंदा डालकर उसकी हत्या कर दी गई। निष्कर्ष अन्त्यपरीक्षण रिपोर्ट के बाद ही निकाला जा सकता है। वह एक दर्जन से अधिक डकैती, लूट, बम विस्फोटक अधिनियम एवं आ‌र्म्स एक्ट मामले का आरोपी था। वह दो माह पूर्व ही जेल से छूटा था और फिलहाल पलासी थाना के समीप ही वह आलू-प्याज की दुकान चला रहा था। ग्रामीणों ने नदी किनारे उसका शव देखा तो पुलिस को इसकी सूचना दी। बाद में उसकी शिनाख्त हबुआ के रूप में हुई।

जब पाप का घड़ा फूटता है..


अररिया : ..जब पाप का घड़ा फूटता है तो जीवन का अंत दुखद होता है। शायद यही कहानी अन्तर्जिला गिरोह के सरगना कभी अररिया पुलिस के सिरदर्द रहे पलासी बस्ती का कुख्यात डकैत हबुआ उर्फ हबीब के जिंदगी में दुहरा गयी। हबुआ की मौत के बाद पलासी एवं आसपास के क्षेत्रों में इस कहानी की चर्चा खुलेआम हो रही है। दो माह पूर्व ही जेल से मुक्त होने के बाद समाज के मुख्य धारा से जुड़ने की लालसा लिए हबुआ पलासी पुलिस एवं पुलिस अधीक्षक से भी मिला था। एसपी के समक्ष हबीब अपराध की दुनिया का तौबा करने की कसम खायी और पलासी थाना के समीप ही आलू-प्याज का दुकान चलाने लगा। हबुआ के समाज की मुख्य धारा में शामिल होने पर पुलिस ने भी चैन की सांस ली। लेकिन कहावत है पाप अपने बाप का भी नही होता। पाप का घड़ा अंत तक भी फूटता ही है। हत्या क्यों और कैसे हुई ये तो जांच का विषय है लेकिन इस घटना के पीछे कहीं न कहीं आपसी रंजिश का परिणाम से जोड़कर लोग देख रहे हैं।
20 वर्ष पूर्व अपराध की दुनियां में आए हबुआ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1994 में गृहभेदन के एक मामले से अपराध की दुनिया में इस कुख्यात ने अपना कदम रखा था। इसके बाद डेढ़ दर्जन से अधिक डकैती, लूट, बम विस्फोट एवं आ‌र्म्स एक्ट के मामले में आरोपित होता गया। 1994 में ही पलासी थाना क्षेत्र के हीं किसी गांव में एक संगठित गिरोह बनाकर डकैती की घटना को अंजाम दिया था। डकैती की पहली घटना में सफलता के बाद वह वर्ष 2009 तक किशनगंज के दिघलबैंक, पूर्णिया के अमौर, डगरूवा, जलालगढ़ एवं आसपास के जिलों में ताबड़तोड़ घटनाओं को अंजाम दिया। डकैती की योजना बनाने एवं बम विस्फोट करने के चार मामले में वह शामिल था। जबकि उस पर रानीगंज एवं पलासी में गृहभेदन के भी दो मामले दर्ज किये गये थे।
बाक्स के लिए
डकैत हबीब का अपराधिक इतिहास
1. पलासी थाना कांड 67/94 -गृहभेदन
2. पलासी थाना कांड 115/94 पलासी में डकैती
3. पलासी थाना कांड 138/04 डकैती एवं बरामदगी
4. पलासी थाना कांड 35/02 चोरी का समान बरामद
5. पलासी थाना कांड 141/04 रंगदारी मांगने
6. पलासी थाना कांड 86/05 मारपीट एवं आ‌र्म्स एक्ट
7. पलासी थाना कांड 11/06 विस्फोटक अधिनियम
8. पलासी थाना कांड 43/09 लूट
9. पलासी थाना कांड 48/09 डकैती की योजना एवं आ‌र्म्स एक्ट
10. रानीगंज थाना कांड 236/2000 गृहभेदन
11. जलालगढ़ थाना कांड 24/09 डकैती योजना एवं आ‌र्म्स एक्ट
12. डगरूआ (पूर्णिया) कांड 48/07 डकैती
13. जलालगढ़ थाना कांड 24/09 आ‌र्म्स एक्ट एवं बम विस्फोट अधिनियम
14. दिघलबैंक (किशनगंज) 47/09 डकैती
15. अमौर (पूर्णिया) 21/09 डकैती
16. अमौर (पूर्णिया) 26/09 डकैती

Thursday, January 26, 2012

कैदियों को दी शांतिपूर्ण जीवन जीने की सीख


अररिया : स्थानीय जेल प्रागंण में बुधवार को विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया। जहां व्यवहार न्यायालय के न्यायिक दंडाधिकारियों ने काराधीन 640 कैदियों को विभिन्न कानूनी जानकारी देते हुए समाज के मुख्य धारा से जुड़ने व सकारात्मक रास्ता अख्तियार करने की बात कही। स्थानीय न्यायालय के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी रवि कुमार एवं एसके मिश्रा समेत अधिवक्ता आदि उपस्थित थे। स्थानीय जेल में निर्धारित 160 पुरुष एवं दो महिलाओं के स्थान पर न्यायिक अभिरक्षा में रह रहे 630 पुरुषों एवं दस महिलाओं को कानून की बारीकियों से अवगत कराया गया। इस विधिक जागरूकता शिविर में जहां कैदियों को उनके अधिकार एवं क‌र्त्तव्य का बोध कराया गया, वहीं जेल से बाहर निकलने के बाद समाज की मुख्य धारा से जुड़कर सकारात्मक कार्य कर शांतिपूर्ण जीवन जीने की सीख दी गई। इसी क्रम में कई कैदियों ने अपनी समस्याओं से भी न्यायाधीशों को अवगत कराया तथा न्याय की गुहार लगायी।

Wednesday, December 29, 2010

मंडल कारा: जेल कर्मी पर अवैध वसूली का आरोप

अररिया : अररिया मंडल कारा में बंद विचाराधीन कैदी दिनेश राठौर एक बार फिर चर्चा में आ गये हैं। उन्होंने अपने जेल में उपर जान का खतरा बताते हुए जेल प्रशासन तथा जेल के जमादार पर कई संगीन आरोप लगाये हैं। हालांकि जेल प्रशासन तथा काराधीक्षक रंजन चौहान ने मामले को बेतुका करार देते हुए उन्हें ही जिम्मेवार ठहराया है।
जानकारी के अनुसार पांच दिसंबर को कटिहार से अररिया मंडल कारा आने के बाद 21 दिसंबर को राठौर ने फास्ट ट्रैक कोर्ट छह के न्यायिक दंडाधिकारी को एक आवेदन देकर अपने जान की रक्षा की गुहार लगाई है। इस आवेदन में राठौर ने जेल के जमादार प्रभुनाथ सिंह पर प्रताड़ित करने तथा 10 हजार रुपए की दर से प्रति वार्ड बेचने व वार्ड इंचार्ज के माध्यम से अवैध उगाही करने का आरोप लगाया है। इसके अलावे उन्होंने जेल के भीतर घटिया खाना खिलाने की भी शिकायत की है। दिनेश राठौर ने कहा है कि वार्ड इंचार्ज को पैसे नहंी देने पर उसके साथ मार-पीट किया जाता है तथा जमादार व सिपाही पांडे द्वारा जान मारने की धमकी दी जाती है। राठौर ने यह भी लिखा है कि प्रभुनाथ सिंह द्वारा गेट पर मुलाकातियों से पैसे वसूलने के लिए कैदी कारन कापड़ी तथा निरंजन मंडल को लगा रखा है। उसने कहा है कि कैदी से बेल बांड व वकालतनामा पर हस्ताक्षर कराने के एवज में 500 रुपया लिया जाता है, जिसका विरोध मेरे द्वारा किये जाने पर अलार्म बजाने के बहाने हत्या की धमकी मिल रही है। एफटीसी 6 के मजिस्ट्रेट एम.के. झा ने मेमो नं. 211 के माध्यम से डीएम को जांच के लिए भेजा है। इधर इस प्रकरण पर काराधीक्षक रंजन चौहान इन सब बातों को नकारते हुए कहा है कि जेल में जब भी हंगामा हुआ है उसका जिम्मेवार राठौर ही है। उन्होंने यह भी कहा है कि 70 से 80 कैदियों ने राठौर पर धमकी देने की लिखित शिकायत मेरे पास की है। जिसे मैने सीजेएम के पास भेज दिया है।