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Saturday, July 7, 2012

रेणु की माटी के लाल ने किया श्रीलंका में कमाल


अररिया : होनहार वीरवान के होत चिकने पात। इस कहावत को अररिया के नन्हे उस्ताद सौरभ आनंद ने शतरंज की दुनिया में चरितार्थ कर दिखाया है। श्रीलंका के हिक्का दुआ में संपन्न हुए अंतर्राष्ट्रीय एशियन यूथ रैपिड चेस चैम्पियनशिप 12 में भाग लेकर तीन गोल्ड मेडल हासिल कर पूरे भारत में बिहार के अररिया की सोंधी माटी की महक फैला दी है।
घर लौटने पर इस अंतर्राष्ट्रीय चैंपियन को हर कोई गले लगा रहा है। रेणु की माटी के इस सपूत ने श्रीलंका के हिक्कादुआ में 25 जून 12 से एक जुलाई 12 तक संपन्न हुए तीन खेल में भाग लिया। जो चाया ट्रांज होटल हिक्कादुआ में खेला गया। इस खेल में विश्व के आस्ट्रिया, मलेशिया, मालद्वीप, यूएई, फिलीपीन्स, बंगलादेश, इरान, इराक, चीन, वियतनाम, श्रीलंका, कजाकिस्तान व भारत समेत 19 देशों के कुल 29 चेस खिलाड़ियों ने अपने देश का प्रतिनिधित्व किया। जिसमें भारत की ओर से खेल रहे नन्हे उस्ताद सौरभ आनंद (बिहार), तामिलनाडु के चेन्नई निवासी एलएनराम अरविंद तथा आंधप्रदेश के राहुल श्रीवास्तव ने भाग लिया। अंदर टेन के इस चेस चैंपियनशिप में सौरभ ने चैंपियन बन पहला स्थान प्राप्त कर तीन-तीन गोल्ड मेडल समेत प्रशस्ति पत्र प्राप्त किया। इस खेल के आयोजन समिति के चेयरमेन, चेस फेडरेशन आफ श्रीलंका के हानी सेक्रेटरी तथा कामन वेल्थ चेस एसोसिएशन के जेनरल सेक्रेटरी समेत जोन- 3, 2 एक आईडीई के प्रेसिडेंट रहे लक्ष्मण बिजे सूरिया तथा चीफ अखीटोर के डिप्टी प्रेसिडेंट आफ एसीएन फडरेशन के कास्टो अबुण्डो के द्वारा हस्ताक्षरित प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
इस चेस टूर्नामेंट का आयोजन श्रीलंका के चेस फेडरेशन द्वारा संपन्न हुआ।
भारत के महान शतरंज खिलाड़ी ग्रेण्ड मास्टर विश्वनाथन आनंद को आदर्श मान सौरभ लगातार शतरंज की बुलंदियों पर चढ़ता जा रहा है। इससे पूर्व भी इसने पा‌र्श्वनाथ कामनवेल्थ चेस चैंपियनशिप 2010 अंदर आठ में मेडल हासिल किया था। जहां कामनवेल्थ के सदस्य देशों के 311 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। जो नई दिल्ली में 18 मई 10 को संपन्न हुआ। इस खेल में भी विश्व के पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, बंगलादेश आदि के खिलाड़ी शामिल थे। इससे पूर्व सौरभ ने नेपाल के काठमांडू में खेले गए टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। श्रीलंका में तिलकरत्‍‌ने, जी एच गुलवर्दना तथा डेनुवान जी एच को द्वितीय तथा ईरान देश के डेरा काशमी बोना, तोफानी कोरक तथा गोसामी उर्मी महाडी को तीसरे स्थान पर रहे। सौरभ अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता समेत दैनिक जागरण को देते कहते हैं कि दैनिक जागरण अखबार को अपना मान चुके सौरभ आनंद समेत इनके बड़े भाई कुमार गौरव तथा पांच वर्षीय नन्हीं बहन गरिमा गौरव को पूर्व से इस अखबार से अपनत्व रहा है। सौरभ के पिता देवनंदन दिवाकर तथा माता कादंबरी देवी तथा हर दम साथ रहे चाचा रविन्द्र कुमार इस नन्हें उस्ताद के उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे हैं। कहते है तंगहाली के बावजूद वे अपने लाडले को यथा संभव उत्साहित तो करते हैं लेकिन सरकार व प्रशासन समेत समाजिक संगठन इस ओर उदासीन है।
घर वापस होने के पूर्व सौरभ सर्व प्रथम अररिया स्थित महा काली मंदिर जाकर पूजा अर्चना किये तथा पुजारी नानू दा ने उन्हें चुनरी भेंट कर सफलता का आर्शीवचन दिया। घर लौटने पर लोगों के साथ एसपी शिवदीप लांडे ने नन्हें उस्ताद को बधाई दी।

Sunday, July 1, 2012

वारंटी बेटे को बचाने का किया अपहरण का नाटक


अररिया : वारंटी पुत्र को पुलिस की गिरफ्त से बचाने को लेकर उसके पिता ने नगर थाने में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज करा दी, लेकिन पुलिस की पैनी निगाहों ने आखिरकार उसे पकड़ ही लिया। यह बात अलग है कि इस कथित अपहरण के आरोप में एक वार्ड पार्षद को जेल भी जाना पड़ा।
वारंटी की गिरफ्तारी के बाद शनिवार को एसपी शिवदीप लांडे ने बताया कि यह मामला काफी गंभीर था। उन्होंने स्वयं इस मामले में दिलचस्पी ली और अनुसंधान कर्ता को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। एसपी ने बताया कि अनुसंधान के क्रम में हीं सूचना मिली कि अपहृत चंदन तेजाब फेंकने का आरोपी है। उसके विरुद्ध न्यायालय ने वारंट भी निर्गत है। वह पुलिस की नजर से बचने के लिए पहले पंजाब गया फिर कुछ दिन पूर्व हीं अररिया आकर छुपकर रोजगार कर रहा था।
विदित हो कि खरैया बस्ती निवासी परमानंद साह ने वर्ष 2010 में हुए तेजाब कांड के आरोपी अपने पुत्र चंदन साह को बचाने के लिए नगर थाना अररिया में थाना कांड संख्या 6/12 दर्ज कराया, जिसमें वार्ड पार्षद अरुण साह समेत 10-15 अन्य को आरोपी बनाया गया। इस मामले की जब पुलिस ने तहकीकात शुरू की तो सूचक का पुत्र चंदन कुमार साह थाना कांड संख्या 414/10 एवं 416/10 में वारंटी पाया गया। उसने वर्ष 2010 में पार्षद के भाई पवन कुमार साह एवं अन्य पर तेजाब फेंक कर बुरी तरह से घायल कर दिया था। वहीं थाना कांड संख्या के तहत एक अन्य मामले 416/10 में राजेश साह ने वारंटी, वारंटी के पिता समेत कई अन्य लोगों के विरुद्ध छीन झपट एवं मारपीट का आरोप लगाया था। पुलिस ने दोनों हीं मामले को सत्य पाते हुए आरोपी के विरुद्ध न्यायालय से वारंट प्राप्त किया। वारंट निर्गत होते हीं वारंटी के पिता ने अपने पुत्र को घर से भगा दिया और अपहरण की प्राथमिकी दर्ज करायी। इस घटना से दो दिन पूर्व वारंटी की मां प्रभा देवी ने भी थाना कांड संख्या 8/10 दर्ज कराकर पार्षद एवं उनके भाईयों के विरुद्ध मारपीट का आरोप लगाया था। इस मामले में पार्षद को जेल की हवा भी खानी पड़ी।

Saturday, June 23, 2012

अररिया में 35 किलो गांजा के साथ तीन युवक गिरफ्तार


अररिया : गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस अधीक्षक शिवदीप लांडे ने शुक्रवार को ठाकुरबाड़ी रोड हटिया में 35 किलो गांजा के साथ तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान पुलिस ने एक युवक के घर से 3.50 लाख रुपये नकद राशि, आधा किलो चांदी एवं सोने का चेन व कर्णफुल भी बरामद की है। बरामदगी के बाद पुलिस ने तीनों युवक के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर लिया है।
मौके पर एसपी श्री लांडे ने बताया कि उन्हें लगातार इस बात की सूचना मिल रही थी कि नशे के सौदागर द्वारा चरस, गांजा, अफीम एवं ड्रग्स का कारोबार व्यापक पैमाने पर किया जा रहा है। इसी क्रम में उन्हें सूचना मिली कि हटिया रोड स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर में बड़े पैमाने पर गांजा की बिक्री की जा रही है। इस सूचना पर जब छापेमारी अभियान चलाया गया तो वहां गुमटी में खुले आम श्याम कुमार चौधरी नामक युवक गांजा बेचते पाया गया। गुमटी में कई बोरी में 35 किलो गांजा भी पाया गया। फिर इसी के निशानदेही पर मनोज कुमार गुप्ता एवं रंजीत कुमार की गिरफ्तारी हुई। एसपी ने बताया कि तीनों युवक वर्षों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर यह करोबार चला रहे थे। एसपी ने बताया कि नेपाल के व्यापारी द्वारा बड़े पैमाने पर आज गांजा की आपूर्ति भी करने की सूचना थी। लेकिन वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया।

Sunday, June 17, 2012

एस ड्राइव: 124 आरोपी गिरफ्तार


अररिया : अपराध गोष्ठी में पुलिस अधीक्षक शिवदीप लांडे क ा तल्ख तेवर दूसरे दिन ही समकालीन अभियान में परिणाम दे गया। एसपी के निर्देश पर चलाये गए समकालीन अभियान में शुक्रवार की रात जिले के विभिन्न थानों की पुलिस ने 124 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी में 56 आरोपियों को जरूरी पूछताछ के बाद जेल भेजा गया जबकि 68 लोगों को जमानत पर रिहा कर दिया। इस क्रम में पुलिस ने 53 मामलों का निष्पादन भी किया।
इस संबंध में एसपी शिवदीप लांडे ने बताया कि अपराध नियंत्रण की दिशा में वे स्वयं प्रयासरत है। इसका नतीजा भी सकारात्मक रूप से सामने आ रहा है। इसके बावजूद यदि केस निष्पादन की गति धीमी होती है तो वे बर्दास्त नही करेंगे। उन्होंने बताया कि स्वच्छ पुलिसिंग एवं लंबित केसों का निष्पादन उनका मकसद है इसके लिए उन्होंने अपने पुलिस कर्मियों को उत्साह हमेशा बढ़ाने का काम किया है।
समकालीन अभियान के तहत नगर थाना पुलिस ने 7, ताराबाड़ी-4, आरएस-4, जोकीहाट- 3, महलगांव-4, पलासी-4, सिकटी-1, फारबिसगंज-5, सिमराहा-2, जोगबनी-1, कुर्साकांटा-4, सोनामनी गोदाम-3, रानीगंज-9, बौंसी-6, भरगामा-3, नरपतगंज-2 एवं घुरना पुलिस ने भी 2 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता पायी है।

Tuesday, April 24, 2012

लीड: डपोरशंखी साबित हुई हैं जल संचयन की घोषणाएं


अररिया : कोसी की पूर्वी कैनाल सिस्टम विगत दो दशक से फेल है। जिले के तकरीबन पांच सौ पुराने तालाब व सौ से अधिक जलकर सूखे पड़े हैं। कोसी फ्लड प्लान की एक दर्जन से अधिक नदियां सूख चुकी हैं। यानी पानी के सैलाब के बीच रह कर भी जल का संकट। यह तस्वीर अररिया जिले की है। यानी, यहां पानी बचाने की सारी घोषणाएं डपोरशंखी ही साबित हुई हैं।
इस संकट का क्लाइमेक्स भी अपनी ही तरह का है। किसानों की पीड़ा है कि खेतों को वक्त पर पानी नहीं मिलता। वहीं, कोसी नहरों में छठ जैसे महापर्व के मौके पर श्रद्धालु पंपिंग मशीन व जेसीबी के सहारे पानी लाते हैं।
जानकारों की मानें तो यह संकट प्रशासन की ढिलाई, विभाग की उदासीनता व एक नजरिये से कहें तो मेन मेड है। इस जिले में जल संग्रहण व संचयन को ले विभिन्न सरकारें अस्सी के दशक से ही घोषणाएं करती आ रही हैं। लेकिन आज तक दावे भले ही खूब हुए हों, किसी घोषणा ने हकीकत का रूप नहीं लिया है।
आजादी के बाद से इलाके को बाढ़ के कहर से निजात दिलाने के लिए कृत्रिम जलाशयों के विकास, छोटे छोटे डैम, बराज, वीयर्स, छिलका, फाटक व मिट्टी के बांध बनाने के नाम पर वादों व दावों का दौर चला, लेकिन हुआ कुछ नहीं। नेताओं व अधिकारियों के दौरे के नाम पर लाखों खर्च जरूर हुए।
महानंदा बेसिन परियोजना, जिसके अधीन परमान व कनकई समूह की नदियां भी आती हैं, के लिए विगत एक दशक से प्रयास चला। योजना आयोग की उच्च स्तरीय टीम ने क्षेत्र भ्रमण किया। कार्य की स्वीकृति मिली तथा पहली किस्त के रूप में साढ़े छह सौ करोड़ रुपयों का आवंटन भी प्राप्त हुआ, लेकिन धरातल पर कही काम नजर नहीं आता।
इस योजना के तहत इलाके की सारी नदियों के किनारों पर बांध व जल संचयन को ले जलाशयों का निर्माण किया जाना था। इन जलाशयों के पीछे यह उद्देश्य था कि इनसे लीन सीजन में जहां सिंचाई व अन्य कार्यो के लिए पानी मिलेगा, वहीं इनका उपयोग जल से जुड़े अन्य कार्यो के लिए भी किया जा सकेगा।
कोसी की बाढ़ भले ही 2008 में आयी हो, इस जिले से गुजरने वाली पूर्वी कोसी नहरें विगत दो दशक से खस्ताहाल बनी हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान कोसी की नहरों से सिंचन लक्ष्य के विरुद्ध पांच प्रतिशत सिंचाई भी नहीं हुई।
बाढ़ को गये साढ़े तीन साल बीत गये, लेकिन अब तक नहरों को कार्ययोग्य नहीं बनाया जा सका है। जबकि इनके जीर्णोद्धार के लिए अरबों रुपये व्यय किये जा चुके हैं।