अररिया : ना कोर्ट में हाजिर हुए ना गए जेल। लेकिन पुलिस की डायरी में तीन आरोपियों को मिल गया बेल। दहेज प्रताड़ना के एक मामले में बौंसी पुलिस ने खेला है यह खेल। पुलिस की इस कार्यशैली पर अब न्यायालय ने अंगुली उठाई है। सीजेएम ने मामले के अनुसंधानकत्र्ता और थानाध्यक्ष को न्यायालय में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
जिले के बौंसी थाना अंतर्गत मोहनी इस्लामपुर की बीबी रफीना खातुन ने अपने पति मो. सरफूल समेत दस लोगों के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न को लेकर रानीगंज (बौंसी) कांड संख्या 227/06 दर्ज करवाया। इस मामले में पुलिस ने दो बार चार्ज शीट दाखिल किया। मामले की शुरूआत में पुलिस की तत्परता इस बात से पता चलती है कि पुलिस ने 21 जनवरी 07 में ही पहला चार्जशीट सात लोगों के खिलाफ दाखिल कर दिया। इन सातों के खिलाफ न्यायालय में ट्रायल जारी है। परंतु इसके बाद अनुसंधानक ने अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया। न्यायालय द्वारा जारी नोटिस के अनुसार अनुसंधानक महेन्द्र प्रसाद राम ने इस मामले का अनुसंधान 30 नवंबर 11 को बंद किया। अनुसंधानकत्र्ता ने 16 जनवरी 12 को न्यायालय से बांकी बचे मामले के सूचक के पति सहित तीन आरोपियों के लिए इश्तेहार मांगा। न्यायालय में समर्पित डायरी की कंडिका 50 में पुलिस द्वारा आरोपियों के घर छापेमारी करने तथा आरोपियों के घर में ही होने का उल्लेख है। पुलिस ने इन तीन आरोपियों मो. सरफूल, मो. इस्लाम तथा बीबी ताय खातुन के खिलाफ 27 जनवरी 2012 को न्यायालय में पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें उक्त तीनों के जमानत पर रहने की बात कही गयी है।
सीजेएम सत्येंद्र रजक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की कार्यशैली पर अंगुली उठाया है। अपने आदेश में कहा है कि इस मामले में जिन तीन के खिलाफ पुलिस ने इश्तेहार प्राप्त किया वो आज तक न्यायालय में हाजिर नहीं हुए। न्यायालय ने थानाध्यक्ष टुनटुन पासवान तथा अनुसंधानकर्ता महेन्द्र राम को नोटिस कर न्यायालय में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
इन बातों पर सीजेएम श्री रजक ने गंभीर रूख अपनाया है तथा बौंसी के थानाध्यक्ष तथा मामले में आईओ को अलग-अलग नोटिस जारी कर दी है। वह वरीय अधिकारी को सूचित करने की चेतावनी देते पुलिस अधीक्षक को नोटिस भेजा है।
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