अररिया, : अररिया प्रखंड के ताराबाड़ी बेंगा पथ पर खमगड़ा गांव के निकट पहली मई की रात एक मोटर साइकिल सवार जा रहा था। उसके साथ एक महिला भी थी। रात का वक्त था और उसे सड़क पर बना विशाल कट दिखायी नहीं दिया। कट में पड़ कर उसकी गाड़ी जोर से उछली और सीधे सड़क से नीचे जा गिरी। महिला की मौत हो गयी और सवार बुरी तरह जख्मी हो गया। जिले में ग्रामीण सड़कों की दुर्दशा की यह केवल एक बानगी है। ऐसे उदाहरण एक दो नहीं दर्जनों में हैं। रखरखाव के अभाव में बरबाद हो रही सड़कें हर रोज किसी न किसी की बलि ले लेती है, लेकिन उन्हें मेनटेन करने वाला तंत्र निष्क्रिय बना बैठा है। इधर, ग्रामीण सड़कों की बदहाली से सड़क हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।
सड़कों की मौजूदा खस्ता हालत ही इस बात का प्रमाण हैं कि उनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं है। जिले की ग्रामीण सड़कें बुरी तरह जर्जर हो चुकी हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के साथ ग्रामीण सड़कों के हनीमून का जो दौर प्रारंभ हुआ था, वह अब लगभग समाप्त हो गया है।
विगत पांच छह साल के दौरान जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में एनबीसीसी के तत्वावधान में बड़े पैमाने पर सड़कें बनायी गयी। लेकिन यह संस्था उनके रखरखाव के प्रति सजग नहीं रही। लिहाजा सड़कों में रेन कट, क्रैक्स व पोट होल्स डेवलप कर गये हैं।
एनबीसीसी के डीजीएम एसके त्रिपाठी से मिली जानकारी के अनुसार जिले में संस्था की दो इकाईयां काम कर रही हैं। इनमें से पहली यूनिट के पास 64 सड़कें हैं, जिनमें से 62 का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं, दूसरी यूनिट के अधीन 28 सड़कें हैं। इनमें से भी अधिकांश का निर्माण पूरा किया जा चुका है।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बताती है। एनबीसीसी की सड़कें जैसी भी बनी हो, वे बदहाली की शिकार हैं। अररिया बैरगाछी से सिकटी तक जाने वाली सड़क एनबीसीसी द्वारा बनायी गयी। लेकिन अब तक इस पर आवागमन सुचारू नहीं हो पाया। लोग व वाहन चले नहीं लेकिन सड़क पूरी तरह जर्जर हो गयी है। ऐसा क्यों हुआ? एनबीसीसी के अधिकारी बाढ़ आने व पुलों के अभाव को इसका कारण बताते हैं। लेकिन क्या सड़क का डीपीआर बनाते वक्त एचएफएल (उच्चतम बाढ़ लेवल) का पालन नहीं किया गया? डीपीआर बनाते समय सड़क में पुल नहीं दिखे थे क्या? अगर हां, तो जनता के पैसों की बरबादी का जिम्मेवार कौन है कि करोड़ों व्यय के बावजूद अब तक एबीएम सिकटी पथ आवागमन के लिए सुलभ नहीं हो पाया है? जोकीहाट, फारबिसगंज सहित कई अन्य प्रखंडों में बनी ग्रामीण सड़कें भी रखरखाव के अभाव में जी का जंजाल बनती जा रही हैं। मुड़बल्ला से खबासपुर पथ की हालत भी जर्जर हो रही है।
हालांकि ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर के अधीन बनी शानदार फोरलेन सड़क व अररिया रानीगंज सुपौल स्टेट हाइवे जैसी सड़कों पर यात्रा करते वक्त सड़कों की बदहाली का एहसास नहीं होता। ये सड़कें चमचमाती काली कालीन की तरह दिखती हैं, लेकिन इन सड़कों को छोड़ कर जरा गांवों में प्रवेश कीजिए तो कालीन के नीचे छिपी गर्द का साफ पता चल जाता है।
क्या कहते हैं एनबीसीसी के अधिकारी:
एनबीसीसी के डीजीएम एस के त्रिपाठी का कहना है कि सरकार से सड़कों के मेनेटेनेंस का फंड नहीं प्राप्त हो रहा है। सड़क पूरा होने के बाद पांच साल तक उसके रखरखाव का दायित्व जरूर है, लेकिन राशि नहीं होने की वजह से सड़कों का रखरखाव नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ रोड के कंप्लीशन के बाद चार साल बीत गए, लेकिन पैसा नहीं मिला है।
श्री त्रिपाठी के अनुसार इस संबंध में ग्रामीण कार्य विभाग के प्रधान सचिव को लिखा गया है तथा एनआरआरडीए के कोआर्डिनेटर को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
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